राजनेता...२२-११-२०२०
*राजनेता* कविता.. २२-११-२०२० ऐक राजनेता की वेदना ये कैसी बेबसी लाचारी है, राजनेता बनना भी अजीब बीमारी है। लोगों को दूर कर दिया, परिवार से दूर हो गए, खौफ का साम्राज्य फैला दिया, देश के हित में निर्णय लिया फिर भी आधे नाखूस हैं रोजी रोटी पर प्रहार कर दिया, ऐसे इल्जाम लगाते हैं किसी तरह से राजकरण करे ये बात समझ नहीं पाते वैसे भी जी रहे थे, परिवार को ढो रहे थे। अब तो उस पर भी चारों ओर चर्चा होती हैं जीने के रास्ते अब और मुश्किल हो गये। कोई तो बता दो मुझे इस हाल में राजनेता क्या करे? राजकीय मामले में भावना से निर्णय नहीं ले सकते अब आप बताएं कैसे कटेंगे ये राजनेता के दिन? भावना भट्ट अमदाबाद... ➖〰️➖〰️➖〰️➖〰️➖