जातिवाद... १५-११-२०२०
*जातिवाद* कविता..
१५-११-२०२०
आज के दौर में समझ नही आ रहा,
ऐ जातिवाद बढता जा रहा है ।
कुदरत ने सबको मनुष्य बनाया था,
हाय रे इन्सान की फितरत देखो ।
जातिवाद और धर्म के सरहदें बांध दी ।
ये भी देख बेचारा ईश्वर भी जी भर रोया,
ऐ इन्सान कि फितरत तो देखो,
जातिवाद के नाम पे बडा बनने की चाहत रखी ।
थकान सी हो गई भावना ये नजारा देखकर,
अब तो जातिवाद के नाम पर खून भी बहाते हैं ।
हर डगर पे अब तो ये हाल है, नोकरी, पढाई सब जगह पे जातिवाद बढ रहा है,
तो,
बुद्धिमान इन्सान की,
ऐ जातिवाद के नाम पर राजनीति है ।
मन सोचता है,
वो लोग कैसे सुखी,
औऱ,
खुश है ,
जो जातिवाद के झगडे करते हैं ।
भावना भट्ट अमदाबाद...
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