सीता... १३-११-२०२०
*विषय :- सीता* कविता .. १३-११-२०२०
मैं सीता मुझे चैन से रहने न दिया,
शांति से कभी मुझे जीने नहीं दिया.
अपने बचपन में जिसे धनुष से खेलती थी,
शर्त रखवाके स्वयंवर रचा और राम ने धनुष तोड दिया.
वनवासी बनकर राम के संग हर दुःख सहे,
रावण ने हरण करके लंका में बिठा दिया.
राम ने रावण को मारकर मेरी अग्नि परीक्षा ली,
फिर भी अयोध्या वासियों ने मुझ पर ऊंगली उठाई.
ये अलग बात के राम मेरी पवित्रता जानते थे लेकिन,
मैं ने राम को न्याय प्रिय राजा बनने दिया.
बाद में ही लक्ष्मण को बोलके बाल्मिकी आश्रम गई,
फिर भी प्रजाजनो ने मुझे चैन से रहने न दिया...
भावना भट्ट अमदाबाद
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