देशभक्ति...२६-११-२०२०
*देशभक्ति* कविता..२६-११-२०२०
आज क्या लिखु क्या न लिखू कलम खामोश हैं,
आँसू गिरते हैं देशभक्ति पर ओर कलम खामोश हैं.
कभी आतंकवाद तो कभी भ्रष्टाचार,
ऐ देख भावना देश के लिए फुट फुटकर रोई.
ये तो हमारे देश के नज़ारे हैं,
ऐ देख देशभक्ति में दिल और जलता हैं.
जो आपसी मतभेदों में उलझ गए है,
जातिवाद और धर्म के मतभेद में फसा देश.
ऐ सिर्फ़ ऐक अकेले से न हो पाए इसके लिए देशभक्ति चाहिए,
हम सब वो बदनसीब हैं जो देश के लिए फना नहीं हुऐ.
देश से हमारा रिश्ता हैं मा बेटे का,
ऐ देश हमारा तो देशभक्ति हमारी जिम्मेदारी है.
आओ फिर से वो देश प्यार जगाए,
देशभक्ति की लहेर जगाए और खुशनसीब बने...
भावना भट्ट अमदाबाद...
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