kalam ki jor... 8-11-2020

*कलम की जोर* 8-11-2020

में कलम से लिखती हुं तो जींदा हुं,
कलम की जोर से मेरी सांसें चलती है ।

मेरी कलम को कमजोर समझना नहीं,
कलम की जोर से बना है मेरा जीवन ।

ऐ किसकी कविता नहीं है,
ऐ मेरी कलम की रचित है ।

भावना सभर भाव से लिखती हुं,
कोई समझे या ना समझे ऐ रचना 

कलम की जोर से ऊंचाई छु शकते है,
हर वो सच्चे ईमानदार की ताकत कलम है ।

कलम से कई दिलों पर राज कर सकते है,
कलम की जोर से हर सीमा लांघ सकते है ।।।
भावना भट्ट अमदाबाद ।।।
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