मेरी परछाई... ९-१२-२०२०
*मेरी परछाई* कविता
९-१२-२०२०
जहाँ हमें छोड़ गये थे लोग,
वहां मेरी परछाई साथ रही.
यादों ने मुझे घेर रखा जहां,
परछाई साथ निभा रही हैं वहां.
खुदकीं खेरीयत खुद से पुछती,
औऱ परछाई से वज़ह ढूंढ रही हुं.
अपनें आपसे भावना रूठी हुं,
परछाई से दिल बहेला रही हुं.
कोई शिकवा नहीं हैं जीवन से,
शिकायते खुद से कर रही हुं.
में और मेरी परछाई साथी हैं,
ऐक दूसरे के हाल पूछते है.
आँखोंमें आँसू पर होंठों पे हंसी है,
परछाई के साथ जिये जा रही हुं..
भावना भट्ट अमदाबाद...
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