आंगन.. कविता
*आंगन* कविता.. १-४-२०२१
आंगन में देखे अरसा हो चुका है,
लाडली तेरे बिना अधूरी जिंदगी है
आंगन में देखे अरसा हो चुका है,
अब भावना खोखली हो चुकी है.
तेरी यादमें जीवन ठहर गया है,
अब आंगन विरान हो चुका है.
घर जैसे खाली हो चुका है,
अब ये उजड़ हो चुका है.
आंगन भी तेरा आदी हो चुका है,
अब चारों और उदास ही फैली है.
भावना भट्ट अहमदाबाद...
( गुजरात )
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